सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य डा. सर्वेश्वर जी ने संबोधित किया। उन्होंने मानसिक तनाव, चिंता, नकारात्मक सोच एवं कार्यस्थल पर उत्पन्न होने वाले मानसिक दबावों से निपटने के लिए आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए।
डा. सर्वेश्वर जी ने बताया कि “मन की स्थिरता ही व्यक्ति की कार्यकुशलता और जीवन गुणवत्ता की कुंजी है। यदि मन स्वस्थ है, तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।” जिसके लिए इंसान को ब्रह्म ज्ञान आधारित ज्ञान के साथ जुड़ना होगा। ध्यान के साथ अर्जुन जुड़ा और उसने महाभारत जैसे युद्ध में भी अपना संतुलन नहीं खोया। अंततः विजयशी को हासिल किया। इसी तरह से हर इंसान अपने जीवन युद्ध का अर्जुन है और उसे भी श्री कृष्ण जैसा मार्ग दर्शक चाहिए जो उसे उसके जीवन में चलने वाले विकारों रूपी युद्ध में विजयश्री दिलवा सके। सेमिनार के दौरान प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक सत्र, ध्यान अभ्यास तथा प्रेरक गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं, जिससे उन्हें मानसिक शांति एवं ऊर्जा का अनुभव हुआ।