divya-jyoti-jagrati-sansthan-lit-up-with-one-lakh-lamps-on-the-auspicious-occasion-of-deepawali
इस पावन पर्व की चमक को चार चाँद ही नहीं अनेकों ही चाँद लगाने के लिए रंग-बिरंगी रंगोलियों एवं व्यर्थ पड़े समान से अनेकों सजावटी उपकरण तथा एक लाख दीयों से पूरे आश्रम को सजाया गया। संध्या के समय एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ भारतीय संस्कृति के अनुसार वैदिक मंत्रों के साथ किया गया।
तत्पश्चात् श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी गरिमा भारती जी ने प्रवचनों में बताया कि आधुनिक युग का यह पर्व केवल धुंआ, कानों को फाडऩे वाला शोर, स्वास्थ्य की हानि इत्यादि तक ही सीमित रह गया है किन्तु नूरमहल आश्रम में यह पर्व धरती माँ के प्यार एवं वातावरण की संभाल को प्रगट करता है इसलिए हम सबका ये दायित्व है कि हम पर्यावरण को स्वच्छ रखे। इस अवसर पर संस्थान द्वारा दिक्षित बच्चों के द्वारा समाज को संदेश देती नृत्य कलाओं का विशेष प्रस्तुतिकरण किया गया। कार्यक्रम के अंत में एक विशाल सामूहिक आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हिस्सा बनने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने पूरे परिवार, दोस्तों के साथ इस पावन आरती में श्रद्घाभाव से समिल्लित हुए।
अपनी आँखों में यादगार दृश्यों की रोशनी तथा दिल में शांति और आनंद का अनुभव लेकर इस शानदार दिव्य दीपावली के पावन पर्व मनाया गया।