
जिसमे पूर्ण सद्गुरु शरणागति साधक को ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा प्रदान कर उसकी दिव्य दृष्टि खोल कर उसे ध्येय स्वरुप ईश्वर के प्रकाश स्वरुप का दर्शन करवाते हैं। फिर आरम्भ होती है ध्यान की शाश्वत प्रक्रिया। जिससे ध्याता अपने भीतर सत् चित्त आनंद को प्राप्त करता है। ईश्वर से एकात्म हुए साधक का हर दिन हर पल एक दिव्य पर्व से जीवन का गर्व बन जाता है।
कार्यक्रम में उपस्थित साधकों ने सामूहिक ध्यान कर जहाँ मानसिक शांति एवं परम आनंद को प्राप्त किया वहीं *साध्वी वसुधा भारती जी ने प्रेरणादायक भजनों व दिव्य मन्त्रों का उच्चारण कर विश्व शान्ति और सर्व जगत कल्याण की मंगल प्रार्थना भी की गई।