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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा   बिधिपुर आश्रम में सत्संग कार्यक्रम किया गया

1 जनवरी (रमेश कुमार) ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा   बिधिपुर आश्रम में सप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम किया गया। जिसमें विश्व शांति की मंगल कामना के उद्देश्य  से सभी साधकों के द्वारा सामूहिक साधना की गई।

श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी पल्लवी भारती जी ने बताया कि ध्यान ही मानसिक शान्ति का उपाय है। हमारी सनातन भारतीय संस्कृति की मेधा प्रज्ञा इस तथ्य को सर्वसम्मति से स्वीकार करती है कि ध्यान से ही मनुष्य मानसिक शान्ति को प्राप्त कर सकता है। परन्तु विडम्बना है कि आज मूलतः सम्मोहन क्रिया को ही ध्यान का अंग स्वीकार कर लिया जाता है। जब कि ऐसा नहीं है। ध्यान तो वैदिक सनातन पद्धति का विशुद्ध अंग है। जो की *”ध्येय और ध्याता”* के संयोग से पूर्ण होता है। समस्त धार्मिक ग्रंथों में ईश्वर को प्रकाश स्वरुप बताया गया है जैसे कि वेदों में ईश्वर को *”आदित्यवर्णम्”* भाव की सूर्य स्वरुप बता कर अंतः करण में उसके प्रकाश स्वरुप दर्शन की बात की गई है। जिसे *”गायत्री मन्त्र”* में *”भर्गो देवस्य धीमहि”* के उदघोषस्वरूप बताया गया है। जिसमे पूर्ण सद्गुरु शरणागति साधक को ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा प्रदान कर उसकी दिव्य दृष्टि खोल कर उसे ध्येय स्वरुप ईश्वर के प्रकाश स्वरुप का दर्शन करवाते हैं।  फिर आरम्भ होती है ध्यान की शाश्वत प्रक्रिया। जिससे ध्याता अपने भीतर सत् चित्त आनंद को प्राप्त करता है। ईश्वर से एकात्म हुए साधक का हर दिन हर पल एक दिव्य पर्व से जीवन का गर्व बन जाता है। कार्यक्रम में उपस्थित साधकों  ने सामूहिक ध्यान कर जहाँ मानसिक शांति एवं परम आनंद को प्राप्त किया वहीं *साध्वी वसुधा भारती जी ने प्रेरणादायक भजनों व दिव्य मन्त्रों का उच्चारण कर विश्व शान्ति और सर्व जगत कल्याण की मंगल प्रार्थना भी की गई।

Satsang program organized by Divya Jyoti Jagrati Sansthan at Bidhipur Ashram

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