इस कार्यक्रम के अंतर्गत साध्वी रूपेश्वरी भारती जी ने भावांजलि का भाव बताते हुए कहा कि प्रभु के श्री चरणों में अपनी भावनाओं की अंजलि को समर्पित करना ही भाव अंजलि है। यही प्रेम व भावों का महादान है जो प्रभु के रिझाने में पूर्ण रूपेण सार्थक सिद्ध होता है। आज विडंबना का विषय यह है कि मानव समाज का जीवन प्रभु से विहीन एक ऐसा रेगिस्तान है जहां भावों की सरिता का बहाना असाध्याय दृष्टिगोचर हो रहा है। वह जीवत्व से शवत्व की ओर बढ़ रहा है। साध्वी जी ने इस समस्या का समाधान देते हुए कहा कि भावों व प्रेम के लिए मानव को प्रभु भक्ति से जुड़ना होगा। प्रभु भक्ति को एक पूर्ण सद्गुरु ही ब्रह्मज्ञान के माध्यम से हमारे भीतर प्रकट कर सकते हैं ।
जिसके अंतर्गत संस्थान का एक प्रकल्प है मंथन जो की संपूर्ण विकास केंद्र है जो अभाव अगस्त बच्चों को मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान कर रहा है ,जहां पर बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जा रही है।