सर्वप्रथम तिलक और मोली करवाकर उन्होंने महाराज जी का आशीर्वाद प्राप्त किया और आश्रम की भव्य ईमारत दिव्य दर्शन भवन में उन्होंने सबसे पहले आगमन किया। इसी के साथ उन्होंने निर्माणाधीन दिव्य सरोवर की स्वामी विश्वानंद जी, स्वामी गिरिधरानंद जी से ३ डी मॉडल द्वारा वहां की पूरी जानकारी प्राप्त की।