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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान नूरमहल आश्रम में सांस्कृतिक दिवाली का उत्सव मनाया गया।

फ्रंट लाइन (रमेश नवदीप) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान नूरमहल आश्रम में सांस्कृतिक मूल्य व पर्यावरण अनुकूल संरक्षण प्रकल्प के तहत प्रदुषण रहित आध्यात्मिक्ता से ओत-प्रोत दिव्य दिवाली का उत्सव मनाया गया। इस पावन पर्व का आंरभ भारतीय संस्कृति के अनुसार वैदिक मंत्रो से किया गया
उसके बाद वहाँ उपस्थित सभी संत समाज और दूर दूर से आए सभी श्रद्धालओं ने अपने हाथों में दीये लेकर श्रद्धा एवं नम भावों से श्री गुरु महाराज जी की पावन आरती की।
मंच पर उपस्थित शिष्यों ने भजनों का गायन किया, जिसे श्रवण कर जन-समूह मंत्रमुगन्ध हो गया। इस उपलक्ष्य में साध्वी सुमेधा भारती जी ने बताया कि दिवाली से पूर्व समस्त संसार साफ़-सफाई की ओर लगा रहता है, किन्तु अपने मन की सफाई की ओर कोई भी ध्यान नहीं देता।
आज प्रत्येक इंसान का मन ईर्ष्या, द्वेष, छल कपट इत्यादि बुराइयों से भरा पड़ा है। मन की सफाई के लिए भी ब्रह्मज्ञान रुपी दीपक की आवश्यक्ता पड़ती है जो केवल पूर्ण गुरु के द्वारा ही संभव है। उसी प्रकाश से ही हम भगवान श्री राम जी के वास्तविक स्वरुप को जान सकते हैं और अपने मन कि मलीनता को दूर कर सकते हैं। स्वामी विश्वानन्द जी ने बताया कि जहां आज का संसार दीवाली के दिन पटाखे फोड़ता हैं वहीं दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान इंसान को श्री राम से जोड़ता है।
इसके पश्चात बड़े ही रोचक अंदाज़ में भगवान श्री राम से जोड़ने के उदेश्य से एक नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसके माध्यम से भक्त हनुमान और आज के एक संसारी व्यक्ति के मध्य हो रहे वार्तालाप को प्रस्तुत किया गया। इसे देख कर सारा पंडाल तालियों से गूंज उठा। दिवाली में 1 लाख 10 हज़ार दीप जलाएं
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आश्रम में विभिन्न स्थलों पर बनाई गयी रंग बिरंगी रंगोलियाँ थी जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। कार्यक्रम के पश्चात आई हुई संगत को पौधे बांटे गए।
Cultural Diwali was celebrated at Divya Jyoti Jagrati Sansthan Noormahal Ashram

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